कौन हैं वो

उसको जाने क्यों लगता है
मैं इतनी बाते बनाता हूँ।
कब समझेगी वो की 
मैं दिल का ही हाल सुनाता हूं।

कुछ समझे कुछ ना समझे
फिर भी मुझको बतलाती है।
वो है पगली जिसके बिन
मैं नहीं रह पाता हूँ।

कुछ तो बात है उसमें
जो इतना याद आती है वो
कुछ भी नही हुँ उसका मैं,पर
सारे रिश्ते निभाती है वो।
मुझको फिर भी नही भुलाती है वो
मुझसे जाने क्या रिश्ता है
जो इतना याद आती है वो।

कहता हूं कि सुनो ना
तो कहती है
क्या सुनाओगे ।
और हां लिखते हो तो 
ये भी लिख दो 
की एक कहानी ऐसी है।
ना राजा है ना रानी है
फिर भी परियो की कहानी है।

नॉटंकी हु मैं वो कहती है।
खुद में मस्त मगन रहती है।
खुशियां ही नही गम भी मुझसे कहती है।
रिश्ता कैसा है मूझसे न जाने
लेकिन खुश साथ, मेरे वो रहती है।
कहती है डर लगता है मुझको।
दुनिया के रिवाजो से
ये अलग थलग सी सोचो से।
कुछ अलग अलग अंदाजों से।

मैं भी उसको बताता हूं
ना डरा करो ऐसे तुम।
जो भी तकलीफ हो 
बस कहा करो मुझसे तुम।
कुछ और नही दे सका अगर 
प्यार से तो समझाऊंगा।
सच झूठ है क्या इसका अंतर
अपने शब्दों में समझाऊंगा।
बस साथ मेरे तुम रहना बस
हर सुख दुख में हु साथ तेरे
तेरी खुशियां मेरी खुशियां
तेरा हर गम भी मेरा है।
घने अंधेरे के बाद
फिर एक नया सवेरा है।


तारीख: 19.09.2017                                                        विनोद महतो






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है