माँ

मै  कभी थक भी जाऊँ अगर जिंदगी की कशमकस में 
तो माँ की साहस भरी सलाह, मुझे थककर बैठने नही देती....

लौटता था पाठशाला से जब दरवाजे पर हर पल तकती 
माँ की नजरें, कभी खुद से मुझे ओझल होने नही देती...

अपने लाल को अपने हाथो से रोटी खिलाने का सुख,
माँ कभी भूलकर भी उस सुख को खुद से अलग होने नही देती..

याद है माँ साईकिल से गिरने पर मेरे घुटने पर लगी मामूली सी चोट,
उस चोट से बहते लहू की लालिमा रात भर चैन से माँ को सोने नही देती...

पूछा था जब माँ से इतना प्यार क्यों करती हो मुझसे,
लगाकर सीने से माँ बोली जिंदगी अपने लाल के बिना मुझे जीने नही देती..

वक्त के बदलाव के साथ हम बड़े तो हो गए,पर माँ की हर वक्त 
ख्याल रखने की आदत उनकी नजर में मुझे बड़ा होने नही देती...

मुझे याद है पहली बार जब रोजी रोटी के लिए तुझे छोड़कर 
घर से निकला था माँ,दर्द भरी वो शाम आज भी तुझे सुकून से रहने नही देती..

खाना समय से खा लिया करना और अपना ख्याल रखना, 
माँ की बातों में छिपी ममता की रोटी मुझे कभी भूखे सोने नही देती..

जानती हूँ कि तु अब बड़ा आदमी बन गया है पर फिर भी बात कर लिया कर,
फोन पर मेरी ख़ामोशी माँ के भीतर के शोर को कम होने नही देती...

आ रहा हूँ गाँव छुट्टियों पर माँ,मेरी यह बात सुनकर 
ख़ुशी की अधिकता भी माँ को चैन से रहने नही देती...

अपनी पहली कमाई से दी हुई साड़ी को माँ सहेजकर रखती है, साड़ी में छिपे 
पुत्र के स्नेह की चमक भाव विभोर माँ की पलकों को सूखी रहने नही देती...

इस जन्म में क्या किसी भी जन्म में तेरे एहसानों का कर्ज चुकता नही कर पाउँगा माँ,
तू मुझे छोड़ के मत जाना, इसी ख्याल से बेचैन धड़कन मुझे खुल के जीने नही देती..

मै कितना भी लिखूँ तेरी ममता के बारे में माँ पर वो कम ही होगा,
तेरे निश्छल स्नेह की स्याही मेरे कलम को कभी रुकने नही देती...

गुजारिश है अपने सभी दोस्तों से ईश्वर से बढ़कर माँ की आराधना करना,
यह वह दौलत है जो कभी इंसान को गरीब होने नही देती...!

नोट- यह कविता समर्पित है उन सभी बेटो और बेटियों को जो किन्ही कारणों वश 
अपनी माँ से दूर है और साथ ही साथ उन माँ लोगों को भी समर्पित है जिन्होंने 
अपने लाल की खुशी और उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए उसे खुद से दूर कर 
दिया है...मै हीरा ठाकुर उन सभी माँ लोगो को शत शत नमन करता हूँ वंदन 
करता हूँ...!   


तारीख: 09.06.2017                                                        विशाल सिंह सूर्यवंशम






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