मैं भी वहीँ से हूँ जहाँ से तुम


मैं भी वहीँ से हूँ जहाँ से तुम
बस फर्क इतना सा है 
तू वर्तमान है मै भूत हूँ 

तू जिस कदर आज है 
उस कदर मै कल था 
तू जिस कदर मौज कर रहा है 
तू जिस कदर मानवता को आज तार-तार कर रहा 
तू जिस कदर आज इंसानियत भूल रहा है 
तू जिस कदर प्रेम की नथ उतार रहा है 
तू जिस कदर इंसा से शैता होता जा रहा है 
उस कदर मै कल था
 
तू भी वहीँ से है 
जहाँ आये दिन बच्चों को अनाथ किया जाता है 
उन के हिस्से का निवाला छिना जाता है 
उनको दर दर सड़को पे भटकने के लिए मजबूर किया जाता है 
जहाँ मासूमो के हाथो में खिलौने की जगह 
कटोरे को पकड़ा दिया जाता है 

जहाँ बेटी को जन्म लेने से पहले ही मार दिया जाता है 
जहाँ एक पंछी को पिजड़े में बंद कर के रखा जाता है 
जहाँ औरत को सरे आम नीलाम किया जाता है 
जहाँ औरत पेट की खातिर रोज अपनी आबरू बेचती है 
वहाँ हम और तुम दोनों खरीदार होते है 
वहाँ हमारी मानवता मरी होती है 
मैं भी वहीँ से हूँ 
बेशक तू आज है मैं कल था 


तारीख: 28.06.2017                                                        रजत प्रताप






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