मेरा मोल?

दुःख होता है सोचकर, देखकर के झुक रहे हो मेरी वजह से। 
क्यों अनायास ही चुपचाप सब सह रहे हो मेरी वजह से। 

जो लायक नहीं आपकी भावना, बलिदान समझने के,
उन्ही से क्यों उम्मीद कर रहे हो मेरी वजह से। 

दुःख होता है देखकर,जो समाज से बंधी लाचारी है। 
आज ये मेरी कल किसी और की बारी है। 

इस शादी के बाजार में आज खुद ही अपनी बेटी का मोल लगाते हो। 
कुछ लेकर नहीं देकर अपना सब कुछ विदा करना, इसे रीत बताते हो। 

बड़ा करते है लाडो से जिसे अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाते हो। 
उसे ही अब हर बात पर झुकना सिखाते हो। 

सारी जिंदगी सबकी नजरो से बचा कर रखा था जिसे;
फिर उसे ही सजा धजा कर पेश करते हो

अजीब है सब मेरे लिए
शायद देखा सोचा नहीं था ये

बस यही चाहती थी के रहुँ आपके साथ हमेशा
पर आज लगता है दूर चली जाऊ, ताकि खुश रहो आप, परेशान ना हो

ताने ना सुनो सबके
आज समझ आता है बेटी होने का दुःख क्यों मनाया जाता है। 


तारीख: 15.10.2017                                                        भाग्यश्री शर्मा






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