ओ मेरी चांदनिया

ओ मेरी चांदनिया जा कह दे तू अपने उस चांद से,
मैं ना बुरी थी, वो ना बुरा था, पर हम खुद को समझ ना पाये,
मैं भी वंही थी, वो भी वंही था, प्यार के दो पल ढूंढ ना पाये । 

ऐसा क्या मांगा मैने जो दूर गया वो यूँ मुझसे,
चाह के क्या दो शब्द प्यार के मैने कोई अपराध किया ?
तू तो मे्रे आसपास ही रहती है हरदम, हरपल,
तू ही बता दे ऐसा हुआ क्या जो हम दोनों सह नही पाये ।

मैं सच्ची थी , वो सच्चा था , प्यार को सच्चा कह नही पाये ।
ओ मेरी चांदनिया जा कह दे, तू अपने उस चांद से,
मैं भी वंही थी, वो भी वंही था, प्यार के दो पल ढूंढ ना पाये । 

मैनें अपने हर एक कण से बस उसको ही प्यार किया,
उसकी ख़ातिर खुद को खो दूं, इतना तक विचार किया,
उसने प्यार नही था फिर भी, क्यों झूठा एहसास दिया,
साथ नही देना था फिर भी, क्यों हाथों मे हाथ दिया।

मैं भी थी पागल, दिल भी था पागल दोनो उसके जाल मे आए । 
क्या था झूठा, क्या सच्चा था, हम दोनो ही समझ ना पाये ।
ओ मेरी चांदनिया जा कह दे, तू अपने उस चांद से ,
उसका भाग्य नही अब जो वो मे्रे प्यार को छू भी पाये,
मैं भी वंही थी, वो भी वंही था प्यार के दो पल ढूंढ ना पाये । 


तारीख: 01.07.2017                                                        पूजा शहादेव






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