प्रेम का इज़हार


मैं लिखता हूं तू कलम बन जा,
मैं कहता हूं तो गजल बन जा!
मैं चलूं तू मेरे कदम बन जा ,
मेरी जीत का तू शिखर बन जा!!
मै गाऊँ तू मेरी सरगम बन जा,
तू दिल की मेरी धड़कन बन जा!

हर पल जो मेरे  पास रहें !
तू ऐसी क़ोई महक बन जा!!

तेरे माँग का मैं सिंदूर बनू ,
तेरे स्वप्नों को मैं पूर्ण करू !!
बिन बोले तेरे लफ्ज़ पढ़ू ,
तुझसे मिलकर परिपूर्ण रहूँ !!!

तेरे सुख का मैं भागी बनू !
तेरे दुख का मैं साथी बनू !!
 तुझे होंठो से मैं छूं पाऊँ !
तू ऐसी कोई ग़ज़ल बन जा !!

मैं लिखतें लिखतें लिख आया, 
इक प्रेम संदेशा लिख आया।
मैं कहते कहते कह आया,
तुमको मैं गजल मैं कह आया !!
  
© ~प्रकाश द्विवेदी (प्रेम)


तारीख: 18.08.2019                                                        प्रकाश द्विवेदी






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