सास बहू

कल शाम सास और बहू  घूमने के लिए चली  
अचानक सासु माँ  के मुख  से ये पंक्ति निकली ॥

भगवान मुझे तो सही समय पर बुलवा लेना 
कभी समाज के लिए बोझ मुझको नहीं बनने देना ॥

इतना सुनकर बहू की आँखे अचानक नम हो आई  ।
मम्मीजी  शंका के बादल कैसे मन में भर लाई ?
बताओ अभी मम्मीजी मैं ऐसा क्या कर जाऊं ?
बुढ़ापे में भी करेंगे सेवा यह विश्वास दिला पाऊँ ?

हनुमान के जैसे छाती चीर नहीं दिखा सकती हूँ  ।
लेकिन तुम दोनों बिन जीवन तकदीर नहीं बना सकती हूँ ॥

बेटा बहू तुम्हारे रहेंगे अपने, चाहे जग सारा बदले ।
माँ बाप पुराने वस्त्र नहीं, जिनको जब चाहें उतार चले ॥

तुम दोनों की शीतल छाया से हम वंचित ना रह पाएँ
तुम्हारे अनुभवी आशीर्वचनों को हम संचित कर सुख पाएँ  ॥

इतना  सुनकर सासु माँ ने बहू को हृदय लगाया ।
उर  से फूट पड़ा जो झरना सारा उस और बहाया ॥


तारीख: 01.07.2017                                                        श्रीमती नरेश तोमर






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