समय

था एक दिन जब हसते थे हम 
था उनका साथ जिसपे मरते थे हम ,

न जाने क्या हुआ 
क्यूं ख़फा हो गयी वो ,

मैं रोता रहा 
कुछ भी न कहा 

बस अपनी बेवकूफियों 
पर हँसता रहा ,

समझा था --
कि दिल लगाना आसान है 

मगर कमबख्त--
दिल तोड़ना आसान हो गया |||


तारीख: 30.06.2017                                                        शिवम् सिहं शिवा






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है