स्वागत नववर्ष का

तब भी तू न मेरी थी ,
और अब भी तू न मेरी है !
"वो" सारी दुनिया भी तेरी थी
और "ये" दुनिया भी तेरी है !!

यूं पीठ दिखाकर चले गए जो
साथ लिए सारी खुशिया ..
रुक जाते ,तुम थम जाते !
तो जी लेते हम दो और घड़िया ||
तब भी तू न मेरी थी
और अब भी तू न मेरी है||

कुछ और बहाना कर देते तो,
दिल को भी बहला लेते !
दूर हो जाना है मजबूरी ,
दोनों के लिए जरूरी है ..
इतना कहकर मेरे दिल में,
धुल फरेब की फेरी है !!
तब भी तू न मेरी थी ,
और अब भी तू न मेरी है !!

फिर भी प्यार तुझी से क्यूँ है मुझको ,
हर बार सोचना पड़ता है !
एक समय हर सजदे में मैं तेरी ,
खुशियाँ माँगा करता था
और आज गैर संग खुश देखा तो ,
दिल को समझाना पड़ता है !!
तू देख न ले खुद को इन आँखों में ,
नजरे चुराया करता था !
आज सामने टकरा जाऊं तो ,
भी नजरे बचाना पड़ता है !!

तब वो भी एक पहर था जानम
जब प्यार जताया करता था ,
आज कहीं तू मिल जाए तो
प्यार छुपाना पड़ता है !!
वाह ख़ुदा तेरा क्या कहना ,
जो तूने किस्मत फेरी है !
तब भी वो न मेरी थी
और अब भी वो न मेरी है !

मेरे जीवन से क्या गए कहाँ ?!
कुछ छोड़ गए ! कुछ तोड़ गए !
जो बचा है उसको बचा रहा
और हार छुपाना पड़ता है !!
जो दिल में है सब झूठा है
खुद को विश्वास दिलाना पड़ता है !

इतनी शिद्दत जो तेरे संग
ख्वाब बुने थे मैंने तब ,
अब उन सब को कोने कर
अरमान बुझाना पड़ता है !
तू अब न मेरी है
दिल को समझाना पड़ता है !!
 


तारीख: 22.06.2017                                                        आदित्य प्रताप सिंह‬






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है