तुम होती साथ अगर

तुम होती साथ मेरे तो बातें  कुछ यूँ  होती, हाथ में मेरे तेरा हाथ  होता,
जब होती हमारी मुलाकातें तो कुछ यूं होती।
निहारता तुझे एकटक, डूबकर नज़रों में तेरी मैं खो जाता,
तुम्हें सुनने को जो बेचैन हो उठता हूँ, बतलाती तुम और मैं सुनता जाता,
बालों में हाथ फिराता , तुमसे मैं प्यार जताता,
सुबहों को देखता मासूम चेहरा तेरा, जब तुम देर तक सोती,
तुम होती साथ मेरे तो बातें कुछ यूं  होती। 

जो तुम साथ होती मेरे तो मुझे कोई डर नहीं होता,
खुश रहते हम साथ हमेशा, दुनिया की बातों का हम पर कोई असर ना होता,
छोटी छोटी सारी ख़ुशियाँ होती, ग़म भी हमें क़ुबूल होता,
काँटे राहों में होते अगर, तो इंतज़ार में कहीं कोई फूल होता,
नोंक-झोंक होती, होती कभी तकरार भी, और मीठी शरारतें होती,
तुम होती साथ मेरे तो बातें कुछ यूं  होती। 

उठती तुम सुबह तो बिखरे बाल और कपड़ों पे सलवटें होती,
तुम होती साथ तो न नम रातें न बदलती करवटें होती,
पास जो होती तुम तो तकिए पे आंसुओं के निशान न होते,
ना सिसकती मेरी रातें होती, साँझ को तन्हाई मेरी मेहमाँ न होती,
धुंधली यादों में न खोजता तुम्हें, ना सन्नाटों में तेरी आवाज़ होती,
होती ज़िन्दगी कुछ और ही मेरी, जो पास तुम मेरे आज होती,

तुम होती साथ मेरे तो बातें कुछ यूं  होती, हाथ में मेरे तेरा हाथ  होता,
जब होती हमारी मुलाकातें तो कुछ यूं होती।
 


तारीख: 06.06.2017                                                        राजेंद्र धायल






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