उन्हें खो कर ये एहसास हुआ

उन्हें खो कर ये एहसास हुआ,
की उनके बिन अधूरा हूँ।

जीता हूँ, चलता हूँ,
ज़िंदा हूँ पर खाली सा,
आहें भरता रहता हूँ,

अपने ऊपर हँसता हूँ,
फिर धीरे से रो पड़ता हूँ,

सुनता हूँ, समझता हूँ,
फिर ना जाने क्या करता हूँ,

उनकी ही यादों में बस,
तनहा तनहा मैं जलता हूँ,

जीने का कोई मकसद नहीं,
पर फिर भी जिया मैं करता हूँ,

उनके सपने देखते देखते,
सो जाया मैं करता हूँ।

उन्हें खो कर ये एहसास हुआ,
कि उनके बिन अधूरा हूँ।।
 


तारीख: 23.06.2017                                                        आकाश जैन






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है


नीचे पढ़िए इस केटेगरी की और रचनायें