विनती

जाता है भाई पढ़ने
मुझे भी जाना है मां I

शिक्षित बालिका एक कुशल गृहिणी
यह नारा चरितार्थ करना है मां I

विद्या से विमुख कर मुझे
तू बना रही है तिरस्कृत राह, मेरे लिए मां I

शिक्षित हो कुछ कमा कर लाऊंगी
समाज में सम्मान भी पाऊंगी I
कुछ नोट मेरे भी घर खर्च में काम आएंगे
आदर व प्रेम घरवालों का पाऊंगी मां I

तू भी करती है हर काम गृहस्थी का
फिर भी मुफ़्त की रोटी तोड़ती,
ऐसा ही सुनती है ना मां I

दे दे मेरे हाथ में भी कलम किताब
भविष्य निर्माण की नींव आज रख दे मां
मुझे भी पढ़ने भेज दे मां I


तारीख: 30.06.2017                                                        निधि सिंघल






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है