उपयुक्त समय है, पढ़ाई पर जुट जाइये !

प्रत्येक चीज का समय होता है, हर चीज अपने समय पर ही अच्छी लगती है। खाने का समय, सोने का समय, जगने का समय, खेलने का समय, फसल बोने का समय, काटने का समय, हँसी मजाक का समय, शादी-विवाह का समय आदि। जब कार्य अपने समय पर ही किये जाते हैं तभी कार्य में आशातीत सफलता मिलती है और यदि कोई कार्य असमय किया जाता है तो आशातीत सफलता नहीं मिलती है, साथ ही जग-हँसाई और होती है। शादी विवाह के गीत केवल विवाह समारोह में ही कर्णप्रिय व मधुर लगते हैं, यदि बाद में वही गीत गये जायें तो गीत सुनाने वाले को लोग ‘मदमस्त’ की उपाधि से विभूषित कर देते हैं। किसान जब समय पर बीज बोता है, समय पर खाद पानी देता है, समय पर फसल की देखभाल व निराई-गुड़ाई करता है तभी वह आशातीत फसल पैदा होने की उम्मीद कर सकता है अन्यथा नहीं! असमय बोई गई फसल आाशा के अनुरूप पैदा नहीं होती है। एक कहावत है ‘ बोये पेड़ बबूल के तो आम कहाँ से खाय’, दूसरी कहावत है ‘जैसा बोओगे वैसा ही काटोगे’, अर्थात जैसा परिश्रम करोगे, वैसा ही परीक्षाफल होगा। समय पर पढ़ाई में जुट जाओगे तो आशातीत परीक्षाफल प्राप्त कर मेरिट में स्थान प्राप्त कर सकते हो अन्यथा कम अंको की डिग्री हाथ में लेकर नौकरी के लिए दर-दर की ठोकरें खाने से आपको कोई नहीं बचा सकता है। इस अनहोनी से बचने का केवल एक ही उपाय है कि कार्य समय से किया जाये, कल के परीक्षाफल की तैयारी आज से ही शुरू कर दी जाये।


आजकल का यह समय पढ़ाई के लिए अति उत्तम समय है। गर्मी की उमस व बरसात की सीलन से आप निजात पा चुके हैं। मौसम बदल रहा है, न अधिक गर्मी है और न ही अधिक सर्दी है, सुहावना मौसम है, उपयुक्त समय है। अतः जुट जाइये पढ़ाई पर और प्राप्त कर लीजिए अपना मनचाहा परीक्षाफल! अभी नहीं तो फिर कभी नहीं! के मुहावरे पर चिन्तन मनन व मन्थन करिये! कहीं ऐसा न हो आप सोचते ही रह जाये और समय निकल जाये फिर पछताने के अलावा कुछ भी शेष नहीं बचता है। ‘अब पछतावे होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत’, वाली कहावत कहीं आपके ऊपर ही चरितार्थ न हो जाये। अतः इस अनहोनी से बचाइये अपने आपको! मेरी बात मानकर आज से व अभी से इसी समय से व इसी पल से जुट जाइये पढ़ाई पर! ‘मनचाहा परीक्षाफल’ आपका इन्तजार कर रहा है। निम्न चन्द सुझावों पर भी यदि आप अमल करें तो आपकी राह आसान हो जायेगी।

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दिनचर्या नियमित करें: पढ़ाई पर दिनचर्या का विशेष प्रभाव पड़ता है जिन लोगो की दिनचर्या अनियमित होती है उनकी पढ़ाई ठीक से नहीं हो पाती है। अतः दिनचर्या नियमित करिये। सोने का समय, जगने का समय, नित्यकर्म से निवृत होने का समय, नाश्ते का समय, लंच व डिनर का समय सबकुछ निश्चित करिये और उसका दृढ़तापूर्वक पालन करिये फिर देखिये आपको मनचाही सफलता से काई नहीं रोक सकता है।


बदलते मौसम में सावधानी बरतें:मौसम बदल रहा है। अतः लापरवाही न करें, अब भरपूर गर्मी नही है अतः कपड़े पहनने में लापरवाही न करे, क्योंकि इन दिनों में लापरवाही से ही सर्दी, जुकाम, बुखार अपनी पकड़ बना लेता है जो आपके हित में नही है। बदलते मौसम के मिजाज को समझना आवश्यक है।


खान-पान का विशेष ध्यान रखे: इस समय पार्टियो, शादियो, होटल व रेस्टोरेन्ट के खाने से परहेज करें। घर पर बना खाना ही खायें, साथ ही यह भी ध्यान रखें कि खाना सुपाच्य व शीघ्र पचने वाला हो, इन दिनो पूरी-पराठा, छोले-भटूरे, चाट-पकौड़े व मिठाई आदि से भी दोस्ती तोड़ ले, साथ ही जूस व फलो का सेवन अवश्य करें। थोड़ा खायें भले ही दिन में कई बार खायें।


तनाव से बचे: तनाव से शीघ्र ही थकान जाती है अतः तनावमुक्त रहें, मन को बोझिल होने से बचायें, हमेशा प्रफुल्लित व मस्त रहें फिर आप देखेंगे कि आपको किस तरह चैप्टर शीघ्र ही याद हो जाते हैं और गणित की जटिल पहेलियों को भी आप चुटकी बजाकर हल कर लेते हैं।


रात को जल्दी सायें व प्रातः जल्दी जगें: देखा गया है कि कुछ छात्र देर रात तक पढ़ते हैं और प्रातः देर से जगते हैं। यह आदत स्वास्थ्य एवं पढ़ाई दोनों के प्रतिकूल है। यदि आप इस गलत आदत के आदी हैं तो इस आदत में तुरन्त सुधार करिये, आज से और अभी से और इसी समय से अन्यथा यह बुरी आदत आपको मनचाही सफलता से वंचित कर सकती हैं। याद रखिये! प्रातः ब्रहम मुहुर्त में सरस्वती विद्या दान करती है जो छात्र प्रातः जगे हुए होते हैं उनकी झोली विद्या से परिपूर्ण हो जाती है और जो छात्र सोये हुए होते हैं उनकी झोली अपूर्ण रह जाती है क्योंकि बीता हुआ समय फिर कभी वापस नहीं आता है।


पढ़ने के आसन पर विशेष ध्यान दें: कुछ छात्र या तो लेटकर पढ़ते हैं या सोफे पर पसरकर पढ़ते हैं! पढ़ाई के यह दोनों आसन ही गलत है। पढ़ाई हमेशा सीधे बैठकर या कुर्सी पर बैठकर ही करें, जब थकान अनुभव करें तो किताब बंद कर सीधे बिस्तर पर लेट जायें, दोनों आँखे बंद कर लें फिर आपने जो चैप्टर पढ़ा है उसका मनन करें इससे आपको दो लाभ होंगे एक तो आप द्वारा याद किया हुआ चैप्टर स्थायी याद हो जायेगा दूसरे आपकी थकान शीध्र ही दूर हो जायेगी। जिससे आप तरोताजा होकर पुनः पढ़ाई में जुट जायेंगे।
प्रातः जगकर पानी अवश्य पीयें: वेदों में प्रातः के जलपान को ‘अमृत पान’ कहा गया है क्योंकि प्रातः का जलपान ‘मन व तन’ दोनों को निर्मल करता है। प्रातः जलपान करने से छोटी मोटी बीमारी तो खुद ही किनारा कर लेती है। साथ ही प्रातः का जलपान पेट साफ करता है। इससे शरीर निरोग व सुडौल बनता है, मष्तिष्क तेज होता है और पढ़ाई में मन लगता है।


कुछ समय व्यायाम के लिए अवश्य निकालें: मनचाहा परीक्षाफल अर्जित करने के प्रयास का यह मतलब नहीं है कि आप व्यायाम का निर्धारित समय भी पढ़ाई को भेंट कर दें, यह कदम आपके लिए आत्मघाती कदम होगा क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है। अतः व्यायाम का निर्धारित समय किसी को न दे, प्रातः व्यायाम अवश्य करें, याद रखें व्यायाम शरीर व मष्तिष्क दोनों को बल व बुद्धि प्रदान करता है। 


छात्र जीवन के पाँचो गुणों का पालन करें: छात्रों में पाँच गुणों का समावेश होना अति आवश्यक है। वह पाँच गुण हैं - पहला - कौए जैसा प्रयास करना अर्थात प्रत्येक समय अवसर की तलाश में रहना, दूसरा - बगुला जैसा ध्यान मग्न होना अर्थात अपने उद्देश्य पर ही ध्यान केन्द्रित करना, तीसरा - कुत्ते जैसी नींद का होना अर्थात सोते समय भी अपने कर्तव्य को याद रखना, चैथा - अल्पहारी होना अर्थात कम भोजन करने वाला, पाँचवा - गृहत्यागी होना अर्थात घर की भौतिक आरामदायक सुविधाओं से अपने आपको अलग कर पढ़ाई में ही जुटे रहना। इन पाँच गुणों को संस्कृत में इस प्रकार कहा गया है - 
    ‘काग चेस्टाः, बको ध्यानं्, स्वान निद्राः तथैव च।
    अल्पहारी, गृह त्यागी, विद्यार्थी पंच लक्षणम्।।


तारीख: 17.03.2018                                                        पंडित हरि ओम शर्मा हरि 






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