मेरी उड़ान

 

छोटा सा मेरा भी आसमान 
छोटी सी मेरी भी हस्ती 
न हो सूरज की गलियां 
पर जुगनू वाली मेरी बस्ती .

मैं भी दिखला दूंगा जग को 
मेरे सपने भी उड़ते हैं 
पंख जहाँ पर थक जाते हैं 
मेरे पंख वहीँ उगते हैं .
 


तारीख: 18.08.2017                                                        कमल किशोर पाण्डेय






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