रुकना राही का काम नहीं

रुकना राही का काम नहीं।
चलो ! अभी विश्राम नहीं।


मंजिल अब खड़ी पुकार रही
बढ़ते जाओ,वह दूर सही


जीवन है पग-पग चलने में
गिरने में और संभलने में


जो भाग गया रणभूमि से
अर्जुन फिर उसका नाम नहीं


चलो ! अभी विश्राम नहीं


तारीख: 05.08.2017                                                        अमिताभ भट्ट






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है