ये हवाओं में आज

ये हवाओं में आज कशिश और नमीं क्यूँ है ?
ये दरख़्तों के पत्तों की सरसराहट में कमी क्यूँ है ?

याद उन्हें भी आयी होगी शायद, जो हर पल याद मुझे है,
ये चाँद एक सा सबकी छत पर, दूर ज़मीं क्यूँ है...... ???            


तारीख: 12.06.2017                                                        अनिल आँचलिया






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