बेचैनियाँ (चुनिंदा शेर )

दिल की कलम से
अपने जज्बात् लिखा करता हूँ
कुछ खास नही बस 
अपने ख्यालात् लिखा करता हूँ

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पहले खुद से तो हो जाऊँ रूबरू
फिर औरों से रफाकत कर लूगाँ

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इस जहाँ खुशीयों से 
हम इस कदर बेखबर है
दर्द की महफिलों को 
आज सबसे बडी खबर है

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हम ठुकराते रहे
मोहब्बत को आज तक
अब मोहब्बत हमें ठुकरा दे
तो हैरत क्या

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कैसे कह दूँ बेवफा
मेरे हाल पर हसँने वाली को
हर हाल में मुस्कुराने की कसम
उसे हमने ही दी थी

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तारीख: 07.06.2017                                                        रामकृष्ण शर्मा बेचैन






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