अपराधी है तो थाना है

अपराधी  है  तो  थाना  है।
कैसा खूंखार  जमाना  है।।

हमको अनजाना शहर मिला,
औ  सारी  रात   बिताना  है।

हासिल करने की ख्वाहिश में,
क्या  अपना  माल  गँवाना है।

सारी  महफिल  मायूस  हुई,
औ  हमको  पड़ा  हँसाना है।

मिली  बेहयाई  हमको  क्यों,
सब  कहते  रहे  लजाना  है।


तारीख: 27.08.2021                                                        अविनाश ब्यौहार






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