बन सखा आज दीदी मेरी आ गयी

 (मेरी दीदी के लिए)


टूटती सांस मे जिंदगी आ गयी
इक अंधेरे के घर रौशनी आ गयी

भाग्य ले कर प्रबल रूप श्री का लिये
आसमाँ से उतरकर परी आ गयी

मेरे बेटा अधर है हमारा अगर
उस पे बेटी मेरी बन हँसी आ गयी

कब से उजड़ा पड़ा था पिता का चमन
साथ ले कर बहारें कली आ गयी

हाल-ए-दिल इस अतुल का वही जानती
बन सखा आज दीदी मेरी आ गयी
 


तारीख: 30.05.2020                                                        महर्षि त्रिपाठी






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