बाज़ार में हूँ खरीदार

कहानी में हूँ किरदार की तरह

बाज़ार में हूँ खरीदार की तरह ।

 

अहमियत बस उतनी है घर में

जैसे चौखटऔर द्वार की तरह ।

 

कोई मेरे बराबर ही नहीं यहाँ

मैं हूँ चीन की दीवार की तरह ।

 

वादा करके मुझे भूल गए हैं वो

सनम भी हैं सरकार की तरह ।

 

अब क्या कहें अजय तुम से

हैसियत में हो बेगार की तरह ।


तारीख: 25.06.2020                                                        अजय प्रसाद






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