एक अलग दुनिया बसाऊँगा

अपनी एक अलग ही मैं दुनिया बसाऊँगा

जहाँ सिर्फ़ हर तरह बेईमानो को बुलाऊँगा ।

 

सच्चाई,इमानदारी, सादगी और खुलूस से

इन सब की मै जमकर खिदमत कराऊँगा ।

 

जब तलक न आत्मा कचौटे खुदगर्ज़ो की

तब तलक मैं अपना खुन पसीना बहाऊँगा ।

 

शायद एहसास हो जाए अपनी गलतियों का

सामने इनके,इनकी करतूतों को दोहराऊँगा ।

 

जनता हूँ अजय ये नामुमकिन है हक़ीक़त में

इसिलिए तो ये फिक्र अपने ख्यालों में लाऊँगा ।


तारीख: 25.06.2020                                                        अजय प्रसाद






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