इश्क़ के कीड़े मेरे दिल में कुलबुलाते रह गये

इश्क़ के कीड़े मेरे दिल में कुलबुलाते रह गये
आशिक़ी के नुस्खे हमें,बस आजमाते रह गये ।


कहा था जिनको चाँद हमने, लगा उन्हें ग्रहण
हर पूर्णिमा मुझे छत पे यूहीं टहलाते रह गये ।


वादा करने में थे सनम सरकार से भी आगे
अक़्सर हमारी मुलाकातें वो टरकाते रह गये ।


टुट न जाये कनेक्शन कहीं लव-ए-इंटरनेट का
अपने फ़ोन में हमसे बैलेंस डलबाते रह गये ।


हम भी कहाँ एसे ही छोड़ने वाले थे उन्हें यारों
उनकी हरएक तस्वीर पे कैचीं चलाते रह गये ।


तारीख: 03.07.2020                                                        अजय प्रसाद






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