इसी छोर पर तूफानों का मजमा लगता है

इसी छोर पर तूफानों का मजमा लगता है
घर डूबते हैं लहरों मे तो सदमा लगता है

अफसोस उस काफिर से कोई कुछ नही कहता
मेरी ही जुबां पर जाने क्यों फतवा लगता है


तारीख: 11.10.2021                                                        मारूफ आलम






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