ख्वाब कोई आंखों में मैंने पनपने नहीं दिया

ख्वाब कोई आंखों में मैंने पनपने नहीं दिया
खुद को आवारा सडकों पे भटकने नहीं दिया ।


होश सम्भालते ही होना होशियार, मुझे पड़ा
जिम्मेदारियों ने मेरी मुझे बिगड़ने नहीं दिया ।


इससे पहले कि कोई तोड़े मेरा भी दिल यारों
किसी जवाँ हसीं को दिल में बसने नहीं दिया ।


ज़ुर्रत न थी खुशियों को कभी पास आने की
गमों ने उन्हें कभी मेरे आगे फटकने नहीं दिया ।


बस मुसल्सल सफ़र में ही उलझा कर रक्खा
रास्तों ने ही मुझे मंज़िल तक पहुँचने नहीं दिया ।


तक़लीफ़ मेरे वजूद को ही रहा है मुझसे अक़्सर
मुझसे यारों मुझे ही आज तक मिलने नहीं दिया ।


तारीख: 20.06.2020                                                        अजय प्रसाद






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