मुझसे आख़िर वो ख़फ़ा क्यूँ है

मुझसे आख़िर  वो  ख़फ़ा क्यूँ है, 
अब वो  लड़की  बेवफा  क्यूँ  है?

मिलना उससे फिर बिछड़ जाना,
फिर  से वो  ग़म सौ दफा क्यूँ है?

कुछ   मजबूरी   पेड़   की  होगी,
वरना  वो  कट  के  हरा  क्यूँ  है?

दिल  को  देना   है   इबादत  तो,
दिल को देना  फिर  ख़ता क्यूँ है? 

उसने   ख़ंजर   ठीक    है   मारा,
फिर भी ये दिल अध-मरा क्यूँ है?

बस    काफी   है  आदमी   होना, 
आखिर  वो  इतना  भला  क्यूँ है? 

उसके   दिल   में  मैं   नहीं  'बेघर'
ये   मेरे   दिल  को  पता  क्यूँ  है?


तारीख: 05.07.2021                                                        संदीप कुमार तिवारी






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