नये दौर में नये मिज़ाज

नये दौर में नये मिज़ाज के साथ

तोड़ रिश्ते कल का,आज के साथ ।

 

हुस्नोईशक़ से परे,हक़ीक़त से भरे

कहूंगा गज़ल नये अंदाज़ के साथ ।

 

तारीफें नहीं तो ,तन्कीदें ही सही

है मुझे कबूल ,पर एतराज़ के साथ ।

 

आँखें मूंद कर आशिक़ी मंजूर नहीं

शायरी मेरी चलेगी,समाज के साथ ।

 

भले गूजर जाऊँ गुमनाम गम नहीं

नहीं चलना अजय रिवाज के साथ ।


तारीख: 25.05.2020                                                        अजय प्रसाद






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