रूप क्या सुनहरा है।

बाली से
खेतों का
रूप क्या सुनहरा है।

सरसों ने पीली
चूनर है ओढ़ी।
अलसी औ मटर की
फब रही जोड़ी।।

गुड़हल का
रंग दिखा
लाल-सुर्ख-गहरा है।

टेसू बसंत का
है बहुत चहेता।
मल्लाह नदी में
नाव सदा खेता।।

किसी धर्मशाले में
राहगीर-
ठहरा है।

आम औ महुआ
गंध हैं बिखेरते।
तोतों के झुंड
जैसे हों टेरते।।

चैत ने तो मानो
पहन रखा
सेहरा है।


 


तारीख: 02.07.2021                                                        अविनाश ब्यौहार






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