शरीर किस काम का

जब तृप्त हो आत्मा,शरीर किस काम का

जो न जागा वक्त पे,ज़मीर किस काम का ।

 

कभी किसी के हक़ में गर दुआ ही न करे

फ़िर भला कहिए फक़ीर किस काम का ।

 

वक्त के साथ जो न बदल दे सियासत को

भला ऐसा बेवकूफ वज़ीर किस काम का ।

 

झकझोर न सका जो जेहन सुनने वालों का

फ़िर बताइए हुजूर तक़रीर किस काम का ।

 

दौलत तुम्हारी गर तुम्हें न दे पाए कोई सुकून

अजय होना तुम्हारा अमीर किस काम का ।


तारीख: 25.06.2020                                                        अजय प्रसाद






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