प्रेशर कुकर

 

हाय! निशा, कैसी हो? अरे, कविता... तुम इतनी लेट? जल्दी जाओ. पहले पी टी एम् अटेंड करलो. बाद में बात करेंगे. मैं तुम्हारा बाहर इंतज़ार करती हूँ.

निशा और कविता एक ही सोसाइटी में रहती है और दोनों के बच्चे भी एक ही स्कूल में पढ़ते हैं. लगभग दस मिनट बाद कविता बाहर आती है. हाँ, बताओ, कविता, कैसी रही मीटिंग? अरे,  वही, बच्चों  की  शिकायते, बच्चे  होमवर्क नहीं करते, मार्क्स नहीं  आते .. मेरा तो सर दर्द हो रहा है.

अरे... अरे... खुद इतना प्रेशर लोगी तो बच्चों का प्रेशर कैसे कम करोगी? चलो... घर चलो, मैं तुम्हे गर्मागर्म चाय पिलाती हूँ. नहीं... नहीं... आज नहीं, आज तो बहुत काम है, मीटिंग के चक्कर में सारा घर फैला हुआ है. निशा तुम ही मेरे घर चलो. बातों बातों में काम निपटा लूंगी और तुमसे बात करके थोड़ा मन हल्का हो जायेगा. बच्चे भी आपस में टाइम स्पेंड कर लेंगे.

ठीक है... सभी कविता के घर जाते है. सच में, घर की हालत देखने लायक थी. चारों तरफ सम्मान फैला हुआ था. निशा तुम बैठो, मैं चाय बनाती हूँ... तभी कविता के बच्चे मम्मी भूख लगी है चिल्लाने लगते हैं.

अरे, मैं कोई बैठने थोड़ी आई हूँ, तुम बच्चों के लिए कुछ बनाओ, मैं तब तक चाय बनाती हूँ... निशा ने कहा...
दोनों किचन मैं जाती है. कविता बच्चों के लिए मैगी बनाती है  और एक तरफ कुकर में दाल उबलने रख देती है. बीच बीच में काम को लेकर चिक चिक करती है. कभी बच्चों पर गुस्सा निकालती है तो कभी बर्तनो पर.

निशा चाय के दो प्याले तैयार कर कविता को बोलती है... पहले आराम से बैठ कर चाय पी, फिर कोई काम करियो.. चाय से ज़्यादा तो तू उबल रही है.

देख, कविता, पहले तो ये समझ ले की, ये सारे काम हमाए घर के हैं और हमें ही खुद ही काम निपटाने हैं. अब हम पर है की हम हंस कर काम करें या रो कर.तभी धड़ाम सी आवाज़ आती है सभी डर जाते हैं रसोई में जाकर देखती है की प्रेशर कुकर का ढक्कन फट गया है और चारों तरफ दाल बिखर जाती है.

कविता निशा की और देखती है. देखो, पुराने कुकर की वजह से तुमने उसकी देखरेख को नज़रअंदाज़ किया और अत्यधिक प्रेशर के कारण फट गया और सारा दोष प्रेशर कुकर का हो गया.आजकल तो बज़ार में कितने फैंसी और कलरफुल प्रेशर कुकर है, तो अपनी तरह एक स्मार्ट कुकर ले आओ जिसकी प्यारी सी सीटी की आवाज़ कानों में रस घोल दे.


प्रेशर से बचने के लिए घर के कामों में परिवार के सदस्यों की हेल्प लें. इससे पहले कि सब बहाने बनाने लगे और घर के कामो से बचने कि कोशिश करने लगे, आप उन्हें समझाना होगा कि ये उनका भी घर है और उनका भी घर के प्रति कुछ फर्ज है. आपके पति और बच्चो को नहीं पता होता की ये कैसे करना है और आपके पास इतना धैर्य नहीं है की आप उन्हें सीखा सके। पूरा भार अपने ऊपर लेने की बजाए, मदद मांगने में संकोच न करे.

बच्चो को सीखिए कि कपड़ो कि सही तय कैसे की जाती है, गंदे कपड़ो को कैसे अलग लांड्री बैग में रखा जाता है और कैसे किताबो को शेल्फ में सजा कर रखते है। उन्हें अपनी अलमारी के अलग-अलग हिस्सों में अपने जूते, परिधान और खिलौने रखने के लिए शिक्षा दे।बच्चों को बेडरूम साफ करने, चादर बदलने और कपड़े धोने के बैग में गंदे कपड़े डालने का काम दिया जा सकता है।

आप अपने माता पिता या सास ससुर से भी घर के कामो के लिए, उन्हें कोई आसान और छोटा मोटा काम देकर मदद मांग सकती है। न केवल उन्हें मदद करने में ख़ुशी होगी बल्कि वे खुद को महत्वपूर्ण भी महसूस करेंगे। कुछ साधारण काम चुनिए जिन्हे एक जगह बैठ कर आसानी से किया जा सके और जिसे करने में बुजुर्गो को कोई परेशानी न हो। आप उन्हें सब्जिया और फल काटने, पुराणी चीजे झड़ने और पोछने, टेबल के कपडे बदलना जैसे आसान कार्य उन्हें दे सकते है। आप उनसे किराने की सूची बनाने, और बच्चे की देखभाल करने जैसे अन्य छोटे कामों के लिए उनकी मदद भी ले सकते हैं.

अपने पति से भी घर के कामों में मदद ले. माना की वे बाहर काम पर जातें पर फिर भी छोटे छोटे कामों में उनकी सहायता अवश्य लें जैसे पौधों में पानी डालना, सब्ज़ी लाना, बच्चों को संभालना,या स्कूल छोड़ना, चाय बनाना, डाइनिंग टेबल सजाना, झूठे बर्तन रखना, अखबार और तौलिया सही स्थान पर रखना आदि.

घर के कामों में मदद होने से तुम अपने लिए समय निकाल सकती हो बच्चों की पढ़ाई और उनकी देखभाल में वक्त दे सकती हो और साथ ही कुछ पल मियां जी के साथ भी बिता सकती हो और कुकर के प्रेशर को खत्म कर एक प्यारी सी सीटी भी बजा सकती हो.

ज़िंदगी का भी यही तरीका है ..ज़िंदगी को भी यदि सहज व स्वाभाविक ढंग से जीया जाए, तो उसका भरपूर आनंद उठाया जा सकता है. "अपनी ज़िंदगी को प्रेशर कुकर बनाओगी, तो जीने का लुत्फ़ ही नहीं आएगा और किसी दिन अत्यधिक प्रेशर से कुकर फट गया, तो याद रखना सबसे ज़्यादा नुक़सान भी कुकर को ही होगा."

वाह निशा तुमने तो मेरा प्रेशर ही रीलीज़ कर दिया. अरे अब कहाँ चली ... निशा ने पूछा ... फटाफट किचन साफ़ करने फिर तुम्हारे साथ बाज़ार जाकर नया स्मार्ट कुकर भी तो लाना है.. कविता ने कहा ..और दोनों सहेलियां हंस देती है.


तारीख: 08.07.2020                                                        मंजरी शर्मा






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