अधूरा प्यार

आज रेनू बहुत खुश है। खुश क्यों ना हो ?आज उसकी बेटी गुड़िया की शादी जो है ।

 लेकिन मन में कहीं ना कहीं एक डर सा भी बैठा है।

 राकेश (रेणुका का पति)-“ क्या बात है रेनू क्या सोच रही हो? बिटिया की शादी है, घर में इतने सारे काम है और तुम पता नहीं क्या सोच रही हो?”

 

 “राकेश तुम तो सभी बात जानते हो फिर भी”

 

 “रेनू तुम चिंता क्यों कर रही हो? हमारी बेटी बहुत ही समझदार है। इतनी पढ़ी-लिखी। खुद एक डॉक्टर है। पिछले 10 सालों से अमित को जानती है। वह भी तो इतना बड़ा डॉक्टर है। बहुत सुलझा हुआ लड़का है। तुम चिंता मत करो रेनू। दोनों बच्चे एक दूसरे से बहुत प्यार करते है।दोनों एक दूसरे के साथ जीवन बिताना चाहते हैं। अमित के माता-पिता भी बहुत अच्छे हैं ।खुद आगे बढ़कर गुड़िया का हाथ माँगा हैं।”

 

 

 अमित अपने माता-पिता की इकलौती संतान है। उसके पिता सरकारी नौकरी करते  है। उन्होंने अपनी सारी जमा पूंजी लगाकर अपने बेटे को डॉक्टर बनाया। अच्छी  संस्कारों वाली गुड़िया से मिलकर वह बहुत खुश थे। जैसी उनकी इच्छा थी वैसी बहू मिल गई थी। अभी कुछ दिनों पहले की ही तो बात है जब मोहनलाल को अपने बेटे की इच्छा के बारे में पता चला था। 

 

 मोहनलाल -“ देखो अमित बेटे इतनी सारी लड़कियों का फोटो आया है। तुम एक लड़की पसंद कर लो। मुझे तो सभी पसंद है। पर साथ तो तुम्हें रहना है इसलिए पसंद तो तुम्हें ही करना है।”

 

“पर पापा वह मैं लड़की”

 

“अरे बेटे तुम हिंचकिचा  क्यों रहे हो ?क्या बात है बोलो बेटा?”

 “पापा मैं एक लड़की से प्यार करता हूं। गुड़िया नाम है उसका। वह भी मेरे साथ ही डॉक्टर है। गुड़िया बहुत अच्छी लड़की है पापा। हम दोनों साथ ही पढ़ते थे।”

 

 मोहनलाल बहुत खुश हुए। उन्होंने अपने बेटे को गले से लगा लिया।

 

 “कब मिला रहे हो मेरी होने वाली बहू से?”

“ पापा आप जब बोलो”

“ ठीक है अगले संडे को बुला लो”

“ ठीक है पापा”

 

 गुड़िया खुशी से फूले नहीं समा रही थी। बार-बार अमित से पूछ रही थी कौन सा ड्रेस पहने? साडी या सूट?

 

 “तुम साड़ी पहनो। साड़ी में तुम बहुत सुंदर लगती हो।”

 

 अमित गुड़िया को लेकर अपने घर पहुंच जाता है। गुड़िया को देख और बात कर अमित  के माता-पिता बहुत खुश होते हैं और तुरंत गुड़िया के पापा को फोन कर शादी की तारीख़ पक्की कर देते हैं। और देखते ही देखते शादी का दिन भी आ जाता है ।

 

 

“राकेश तुम चलो मैं थोड़ी देर में आती हूं”

“ ठीक है पर जल्दी आना। चाय पीने की इच्छा हो रही है” ये कहकर राकेश  बाहर चला जाता है। राकेश के बाहर जाते ही रेनू अपने अतीत में खो जाती है।

 

रेनू और मोहनलाल एक ही क्लास में पढ़ते थे और दोनों के पिता भी एक ही ऑफिस में काम करते थे। मोहन के पिता ऊंचे पद पर थे और रेनू के पिता एक क्लर्क। रेनू और मोहन दोनों में बहुत अच्छी दोस्ती थी और धीरे-धीरे दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगे और दोनों शादी करने का सपना भी देखने लगे। घर से दूर एक पेड़ के नीचे बैठे दोनों घंटों बातें करते और अपने सुनहरे भविष्य के सपने देखा करते थे। पर होनी को कुछ और ही मंजूर था। मोहन के पिता को इसकी भनक लग गई और उन्होंने बिना किसी को कुछ बोले अपना तबादला  किसी और शहर में करवा लिया। जब मोहन और रेनू को इसकी खबर हुई दोनों एक-दूसरे का हाथ थामे घंटों रोते रहे।

 

 “अब क्या होगा मोहन? में तुम्हारे बगैर नहीं रह पाऊंगी?”

 

“ मैं भी तुम्हारे बिना नहीं जी पाऊंगा। चलो हम लोग भाग कर शादी कर लेंगे”

 “नहीं मोहन! यह सही नहीं होगा। हम लोग शादी करके कहां जाएंगे क्या करेंगे क्या खाएंगे?”

 

 दोनों रोए जाए थे और देखते ही देखते दोनों के बिछड़ने  का समय आ गया। जाते समय मोहन  सिर्फ इतना ही बोल पाया रेनू हम लोग जिंदगी में आगे बढ़ेंगे और इस जन्म में ना सही अगले जन्म में जरुर मिलेंगे। रेनू मोहन को भरी आंखों से जाते देख रही है और मोहन की आंखों से ओझल  होते ही रोने लगती है।

 

राकेश कमरे में घुसते ही में रेनू को रोते देखता है।

 

“ रेनू क्या हुआ? तुम रो क्यों रही हो ?”

रेनू अपने आप को सामान्य करते  हुए बोलती है- “अरे कुछ नहीं। चलो चलो  बहुत काम पड़ा है। तैयारी करते हैं।”

 

 रेणु का पूरा घर दुल्हन की तरह सजा हुआ है। गुड़िया दुल्हन की लिबास में बहुत ही सुंदर लग रही है। रेनू अपनी प्यारी बेटी को जी भर के देखती है और मुस्कुरा कर गले लगा लेती है ।

“चलो चलो बारात आ गई”- राकेश दरवाजे की तरफ दौड़ता हैं।

 अमित भी एक राजकुमार की तरह लग रहा था। रेनू अपने दामाद को देखकर बहुत खुश हो रही थी। पर अचानक  अमित के पापा को देखकर अचंभित हो जाती है । कुछ समझ में नहीं आ रहा था यह क्या हो रहा है और मोहन मुस्कुराकर सिर्फ रेनू को देख रहा है और अपने मन में बोल रहा है -

“रेनू किस्मत हम दोनों को मिलने नहीं दिया पर हमने हमारे बच्चों को मिला दिया”

 रेनू मन ही मन मोहन का आभार प्रकट कर रही है और दोनों बिना कुछ बोले एक दूसरे को मुस्कुरा कर देखते हैं। अमित और गुड़िया की शादी बहुत धूमधाम से होती है।


तारीख: 12.09.2020                                                        रश्मि झा






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