गुड़िया की गुड़िया

 

रमा आज बहुत खुश है. आज उसकी प्यारी सी गुड़िया मिनी की शादी है. मिनी दुल्हन के लिबास में बहुत ही सुन्दर, बिलकुल गुड़िया जैसी लग रही है.  वो  दूर  से  ही अपनी नटखट  गुड़िया को निहार रही है, जानती है वो पास जाएगी तो दोनों अपनी भावनाएं नहीं रोक पाएंगी और आंसूओं का सैलाब बह जायेगा.

कब उसकी छोटी सी गुड़िया बड़ी हो गई, पता ही ना चला.बहुत ही लाड प्यार से पाला था उसने अपनी गुड़िया को. उसकी बेटी उसका "अभिमान" था. उसे याद आया कैसे उसने अपनी अजन्मी बच्ची को बचाया था. रमा बहुत ही सुन्दर और संस्कारी लड़की थी. एक सरकारी स्कूल में अध्यापिका के पद पर थी. तभी माँ बाप ने उसकी शादी रमेश से कर दी. रमेश भी सरकारी बैंक में काम करता था. दोनों का जीवन सुखमय चल रहा था. कुछ समय बाद रमा गर्भवती हुई, सब बहुत खुश थे, लेकिन कुदरत को कुछ और मंज़ूर था. अचानक उसके पेट में दर्द हुआ और जब उसे डॉक्टर के पास ले जाया गया तो पता चला की उसका मिसकैरेज हो गया है. वह मन और शरीर से एकदम टूट गई.  समय बीता और लगभग पांच महीने बाद वह फिर से प्रेग्नेंट हो गई.

घर में ख़ुशी की लहर आ गई. रमेश ने उसे नौकरी छोड़ घर पर ही आराम करने को कहा. रमा भी बच्चे के आने की ख़ुशी में मान गई. रमा अपने रूटीन चेक के लिए अपनी सास के साथ गई. डॉक्टर ने बताया की कुछ प्रॉब्लम है, टेस्ट कराने होंगे. डॉक्टर ने रमा को बताया की रिपोर्ट कल तक आएगी. रमा अपनी सास के साथ बाहर आ गई. जैसे ही वो घर जाने लगी उसे याद आया की वो अपनी फाइल्स डॉक्टर के केबिन में भूल आई है. वो जैसे ही केबिन में जाने लगी उसने डॉक्टर के केबिन में रमेश को देखा. वो दोनों उसकी ही बात कर रहे थे. वो वहीँ दरवाज़े के बाहर उनकी बातें सुनने लगी. डॉक्टर उसे बता रहे थे, की इस बार भी लड़की है, पिछली बार तो तुम्हारे और माताजी के कहने पर मैंने उसे अबो्र्ट करने की दवाई देदी, लेकिन इस बार अगर एबॉर्शन हुआ तो उसकी जान को खतरा हो सकता है. इसलिए इस बार लड़की होने दो, अगली बार चांस ले लेना. रमेश गुस्से में आग बबूला हो गया. बोलै- "मरती है तो मर जाए मुझे केवल लड़का ही चाहिए मैं दूसरी शादी कर लूँगा".

ये सुनकर रमा काँप गई, ऐसा लगा जैसे उसके पैरों से ज़मीन खिसक गई हो. वो केबिन के अंदर गई, उसे देखकर रमेश और डॉक्टर दोनों ही हैरान हो गए.

रमा ने चिल्लाते हुए कहा-"इतना बड़ा छल". तुमने अपनी ही बेटी को मार डाला और अब एक बार फिर. "तुम बाप नहीं कसाई हो" और ज़ोर का तमाचा मार कर हमेशा हमेशा के लिए अपने मम्मी पापा के घर आ गई.

वहां उसने अपनी प्यारी सी गुड़िया मिनी को जन्म दिया और अपनी नई ज़िंदगी शुरू की. उसने वापिस अपनी नौकरी ज्वाइन कर ली. मिनी को उसने खूब पढ़ाया और काबिल बनाया. मिनी भी आत्मविश्वासी और स्ट्रांग थी. दोनों ही एक दूसरे की साथी थी. जैसे जैसे उसकी विदाई पास आ रही थी उसका दिल बैठा जा रहा था. तभी रमा की माँ आ गई और उसके सर पर हाथ फेरने लगी. बेटी ये तो रीत है .  रमा की माँ  ने कहा -आज तो मेरी "गुड़िया की गुड़िया" की शादी है और तीनों एक दूसरे के गले लग कर रोने लगी.


तारीख: 20.06.2020                                                        मंजरी शर्मा






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