ऐ जिंदगी

ऐ जिंदगी, तुम कितनी खूबसूरत हो

आज पता चल गया कि  तुम कितनो की जरुरत हो

यूँ लगता था,अन्धकार में प्रकाश की कोई राह न थी

ज़िंदगी को जीने की ऐसी कोई चाह न थी

क्यों, फिर तुम आयी, अब सब कुछ क्यों अच्छा- अच्छा  सा लगता है

झूठी बाते सुनकर भी सब सच्चा - सच्चा सा लगता है

खुश रहने को दिल करता है,खुलकर हसने को जी करता है

पर वो कहते है, अब वक्त तो तेरे पास नहीं

कुछ वक़्त पड़ा है तेरे पास,अब बचने की कोई राह नहीं

अब हॅसते-हॅसते रोता हूँ,जगने के वक़्त मैं सोता हूँ

तुम रोना मत मेरे जाने पर,तुम खोना मत मेरे जाने पर

मैं फिर लौटकर आयूंगा,तेरी दुनिया में सपने बनकर

यही सोचकर जाता हूँ,हॅसते- हॅसते

तेरे  सपनो में,मेरे आने का अब इन्तजार करता हूँ

अब मैं चलता हूँ,अब मैं चलता हूँ II


तारीख: 01.05.2020                                                        अंकित कुमार श्रीवास्तव






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