बाकी सब ठीक है

 

सत्य का हनन हो रहा है
असत्य का प्रचलन आम हो रहा है
भ्रष्टाचार बढ़ रहा है, खा रहा है सदाचार को
और बढ़ा रहा अत्याचार को
बाकी सब ठीक है।


फल-फूल रहा है व्यभिचार
आतंक फैला रहे विचार और व्यापार
नारी सिर्फ कहने को सबला बची है
पर सत्य तो, बेचारी अब तक अबला बनी है
बाकी सब ठीक है।


मंहगाई तोड़ रही सबकी कमर
और दिनों-दिन बढ़ रही इसकी उमर
स्वच्छ पर्यावरण तबाह है
स्वस्थ वातावरण खफा है
बाकी सब ठीक है।


ढोंगी कमा रहे धर्म के नाम पर
बाँट रहे हैं सबको उसके नाम पर
नेता भर रहे अपना घर, उजाड़ दूसरों का सुखी घर
और बना रहे जनतंत्र को पिछड़ा घर
बाकी सब ठीक है।


मिलावटी बेच रहे मिलावट कर
और छीन रहे सबसे उनका प्रथम सुख
अधर्म की धर्म पर जीत का मार्ग निर्मित हो रहा
हम न रह गए हम, तुम न रह गए तुम
बाकी सब ठीक है।
 


तारीख: 18.08.2017                                                        अमर परमार






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है


नीचे पढ़िए इस केटेगरी की और रचनायें