
एक दिन यूँ कहा बेटे ने बाप से,
"क्या किया है हमारे लिए आपने?"
बाप था मौन, पर कह बहुत कुछ गया,
बिन बोले वहाँ से चला वो गया।
बेटा समझा कि अब जीत मैं ही गया,
बाप था सोच में, बेटा क्या कह गया।
"एक दिन यूँ कहा... क्या किया आपने?"
जन्म मैंने दिया और पालन भी किया,
ख़ुद फटे हाल में रहा, पर तुझे सब दिया।
फिर भी तूने मुझे आज यह क्या कह दिया?
अपनी औक़ात से मैंने बढ़कर दिया।
"एक दिन यूँ कहा... क्या किया आपने?"
मैंने सोचा था कि राम घर आया है,
क्या पता था कि वो सिर्फ़ एक माया है।
राम के वेष में मैंने कंस पाया है,
आज तूने मुझे मेरा क़र्ज़ चुकाया है।
"एक दिन यूँ कहा... क्या किया आपने?"