कहूँ ऋषि कपूर या कोनिहूर

“जीवनी को पिरोके बनाई है माला,

रचना के माध्यम से वृत्तान्त कह डाला ।

आशा है आपके दिल में समाएगा,

थोड़ा बहुत ही सही, आपको पसंद आएगा ।

आपका - अभिनव (“अभी”)”

 

कहूँ ऋषि कपूर या कोनिहूर…

 

कहूँ ऋषि कपूर,

या कोनिहूर,

है एक ही बात,

है एक ही बात । 4

 

नाम किया अपना सार्थक,

तप किया था अंत तक,

सब अपने बलबूते पर,

चूम लिया था अंबर । 8

 

चॉकलेटी छवि,

प्यार की पदवी,

था जैसे रवि,

आकर्षित सभी । 12

 

निर्माता, निर्देशक,

अभिनेता आकर्षक,

चलता था अनथक,

होते पागल थे दर्शक ।16

 

मिस्टर चिंटू

ना कोई किंतू,

था चन्द्र बिंदू,

मुस्लिम और हिन्दू । 20

 

पूत के चरण,

पालने में आए नज़र,

बचपन में ही दिखी झलक,

भविष्य का कुलदीपक ।24

 

३ साल से अभिनय शुरुआत,

'श्री 420' में किया था काम,

सबके दिलों पर किया था राज,

अभिनव अदाकारी, थे अलग अंदाज़ ।  28

 

पाँच दशक तक चलचित्र,

श्रम प्रयास सफलता मंत्र,

बिखेरा चारों तरफ इत्र,

गज़ब जुनून, आदर्श चरित्र ।  32

 

रोमानी दौर को किया आरंभ,

सिने जगत के थे वो स्तम्भ,

किरदार में गुम, करते थे दंग,

मनमोजी वो, मस्त मलंग ।  36

 

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता,

सारे वर्ग का था चहेता,

हँसता, हँसाता और संजीदा,

मँझा हुआ वो था अभिनेता ।   40

 

थी परिपक्वता,

जैसे घर का बड़ा,

बरगद क पेड़,

हरदम मुस्तैद । 44

 

ऐसा था काम,

जैसे चारों धाम,

अब पूर्ण विराम,

अब पूर्ण विराम ।48

 

था इक्का पत्ता,

उसकी थी सत्ता,

ऐसे अभिनेता,

इतिहास रचयिता । 52

 

माना मिली विरासत,

पर काफ़ी मुशक्कत,

जन्मजात काबिलियत,

अच्छी भी नीयत । 56

 

वो था गुलदस्ता,

हरदम था हँसता,

गुलशन महकाता,

उसमें रब बसता ।  60

 

था बेहतरीन,

जैसे नई दुलहिन,

वो आफ़रीन,

जैसे पहला दिन । 64

 

था लाजवाब,

हम सबका ख्वाब,

कितने ही ख़िताब,

वो खुली किताब । 68

  

ऐसा अदाकार,

था सदाबहार,

यारों का यार,

था भी खुद्दार ।  72

 

अर्जित की शोहरत,

और साथ में दौलत,

माना अच्छी किस्मत,

काफ़ी पर मेहनत । 76

 

बेहद खूबसूरत,  

दिल दया की मूरत,

था छैला सुंदर,

रूप जैसे समुंदर । 80

 

था एक मिसाल,

उसका ही ख़याल,  

चित्त बहुत विशाल,

वो बेमिसाल । 84

 

था ज़िंदादिल,

वो था खुशदिल,

आभा झिलमिल,

था प्रगतिशील । 88

 

था सुबह की ओस

भरसक था जोश,

करता मदहोश,

वो था फिरदौस । 92

 

सच्चा देश भक्त,

वो जैसे दरख़्त,

आतंक पे सख़्त,

जो दिल में – व्यक्त । 96

 

जनता से की अपील,

एकजुट होकर मिलेगी जीत,

हिन्द का हर पल चाहा हित,

वो बेबाक, वो था पुनीत । 100

 

दिल लेता था छू,

जैसे कोई ख़ुशबू,

मंत्रमुग्ध देह रूह,

कीर्ति यश आबरू । 104

 

था जैसे जादूगर,

बड़ा गहरा असर,

छाप छोड़ी अमर,

प्रभाव अक्सर । 108

 

प्रसन्नचित्त व्यक्तित्व,

ऊर्जा से लिप्त,

संतुष्ट व तृप्त,

गुण अनन्य, ना संक्षिप्त ।   112

 

बहुआयामी जीवंत,

योगी जैसे संत,

मुस्कान सदैव अनंत,

गीता क़ुरान का ग्रंथ ।  116

 

जीवन के कई रूप,

कभी छाँव, कभी धूप,

उतार छड़ाव भरपूर,

चुनोतियाँ मगर मंज़ूर ।  120

 

प्रतिभा अपरामपार,

गलतियाँ स्वीकार,

भावुक इनसान,

अतुलनीय, प्रथम स्थान ।  124

 

दिग्गज कलाकार,

बिलकुल दमदार,

ना मानी कभी हार,

चट्टान दीवार । 128

 

राजनीति से फासला,

महारत हर एक कला,

मोहब्बत का सिलसिला,

ना कोई मुक़ाबला ।  132

 

असाधारण अभिनय कौशल,

मानवीय रिश्तों का दर्शन,

याद करे हर मन,

नतमस्तक अभिवादन ।136

 

किंवदंती महानायक,

परिपूर्ण विनायक,

अद्भुत और लायक,

मददगार सहायक ।  140

 

पीढ़ी दर पीढ़ी,

मनोरंजन की सीढ़ी,

उपयुक्त हर शैली,

ख्याति तभी फ़ैली ।  144

 

उम्र का हर पड़ाव,

आया अनुभव व निखार,

निष्ठा थी आधार,

भद्र सभ्य संस्कार । 148

 

युवा दिलों की धड़कन,

देख झूमता तन बदन,

बेशकीमती आभूषण,

प्रचुर जज़्बा और अगन । 152

 

ऐसी श्रेष्ठता को नमन,

यथासाध्य थी लगन,

थी रौनक और चमक,

धरा गर्वित और गगन । 156

 

था आत्मीयता का संबंध,

इंसानियत की गंध,

एक युग का अंत...

एक युग का अंत...  160


तारीख: 02.05.2020                                                        अभिनव






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