नियति


कल कल करता नीर
साँय साँय बहती समीर
जल की ठोकरों से पत्थरों का मुलायम होना
हवा के बहाव से पत्तों का थरथराना
ये नियति है
उसी तरह
जीवन में मेरे
अपशब्दों का बरसना
धोखों कोअविरल सहना
अपने में खोए रहना
एक आदत सी बन चुकी है
क्योंकि 
ये मेरी नियति है।


तारीख: 20.08.2019                                                        अंजु राणा






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