प्रार्थना आए सद्बुद्धि

 

 

सन्यासी "साधु",

है देश का जादू ।

 

संस्कृत का शब्द,

तन में जैसे रक्त ।

 

तप की मिसाल,

संस्कृति की ढाल ।

 

त्याग का जीवन,

सम हरदम है मन ।

 

सामान्य अर्थ 'सज्जन व्यक्ति',

ईश्वर की अनथक भक्ति ।

 

मूल उद्देश्य मार्गदर्शन,

समाज का पथप्रदर्शन ।

 

धर्म का चले मार्ग,

बिल्कुल बेदाग ।

 

मोक्ष करता है प्राप्त,

आनंद आध्यात्म ।

 

साधना वरदान,

जग को दे ज्ञान ।

 

हुई निर्मम थी हत्या,

मानवता शर्मिंदा ।

 

उनका बलिदान,

सब आहत परेशान ।

 

हिन्द हुआ कलंकित,

दहशत व चिंतित ।

 

अमानवीय दुष्कृत्य,

बर्बर व निंदनीय ।

 

महाराष्ट्र का पालघर,

साधुओं की हत्या वध ।

 

गुस्से की लहर,

अमृत में ज़हर ।

 

भीड़तंत्र षड्यंत्र,

हैरान न्यायतंत्र । 

 

निहत्थे वृद्ध साधु,

भीड़ हुई बेकाबू ।

 

बेरहमी से हमला,

दर्पण हुआ धुंधला ।

 

हुई मॉब लिंचिंग,

आती है घिन्न ।

 

कारण अफ़वाह,

शैतान दुष्ट राह ।

 

लाठी डंडों से वार,

कांपा घर बार ।

 

मच गया हड़कंप,

देश सुन्न व दंग ।

 

अपराधी की क्या सोच ?

एक पल भी ना संकोच !

 

दोषियों के ख़िलाफ़,

कठोर दंड इंसाफ़ ।

 

कहां गए संस्कार ?

रिश्ते बंजर बेकार ।

 

पशुवत क्रूर दृश्य,

कहां गुरु शिष्य ?

 

पत्थर हुए दिल,

गया मैं हूं हिल ।

 

दिया झकझोर,

ये कैसा दौर ?

 

दुर्भाग्य की बात,

नम हैं जज़्बात ।

 

क्रूरता की हद,

हूं मैं निःशब्द ।

 

आए दिलों में शुद्धि,

प्रार्थना आए सद्बुद्धि,

प्रार्थना आए सद्बुद्धि ।


तारीख: 01.05.2020                                                        अभिनव






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