ये लेख है

ये लेख है,

कविता नहीं है।

 

कविता प्रार्थना की भाँति होती है ,

चाहे उसमें शिकायत ही हो ।

 

कविता अराधना की भाँति होती है ,

चाहे उसमें पीड़ा ही हो ।

कविता आह्वान की भाँति होती है ,

चाहे उसमें ग़ुस्सा ही हो ।

 

प्रार्थना, अराधना, आह्वान

तब सार्थक हो जाते है,

 

जब उस तक पहुँच जाते है 

जिसको स्मरण करके उनकी रचना हुई हो


तारीख: 17.05.2020                                                        गौरव






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