बदला ताना बाना


देखो ! वक़्त का बदला मिज़ाज     
न रहा कल और न ही रहेगा आज।
संकट की इस विकराल बेला में,
बदला समाज बदली सोच
बदला ताना बाना है
सोशल डिस्टन्सिंग के इस दौर में
जनमानस समूह 

अब लगता गुज़रा जमाना    
चहुं ओर एक अजब सी शांति छाई है,                 
 प्रकृति भी मानो एक नवरूप लेकर आई है।
 जीव -जंतु भी निर्भीक लगने लगे हैं,         
 पक्षियों का कलरव भी अब देता सुनाई है। 
 चूंकि धरा प्रभु ने उनके लिए भी बनाई है।             
 अनियंत्रित प्रदूषण भी घटने लगा है।       
 जब से मनुष्य घर से निकलने में सोचने लगा है।              
 
 भागदौड़ भरा जीवन रुक सा गया है,     
 अतिव्यस्तता का चक्र भी तो थम सा गया है।       
 परिवार शून्य होते जीवन में
 नव -चेतना आयी है।               
 अपनों के लिए अपनों के पास 
 की संकल्पना उभर कर आई है।      
 सोशल डिस्टन्सिंग के दौर में, 
 भावात्मक एकता को बढ़ाना है।
 स्वहित छोड़ राष्ट्रहित सर्वोपरि बनाना है।      
 
 स्व-अनुशासन ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है,  
 यही वर्तमान की उत्कृष्ट पूंजी है।            
 बदला समाज ,बदली सोच
 बदला ताना बाना है,        
 वैश्विक महामारी के चंगुल से   
 राष्ट्र को बचाना है,
 राष्ट्र को बचाना है।


तारीख: 20.05.2020                                                        पूजा शर्मा






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है