बस ज़िंदगी खुशहाल हो

 

दिन हो बहार के, गुल ऐ गुलाज़ार 
हर तरफ खुमार ही खुमार हो
रंज का न कोई मकड़ जाल हो
बस ज़िंदगी खुशहाल हो, बस ज़िंदगी खुशहाल हो

मिटे नफरते समाज से, न दहशत ऐ बवाल हो
चले खुशबुओं की आंधियां,न दिल में कोई मलाल हो
बस ज़िंदगी खुशहाल हो, बस ज़िंदगी खुशहाल हो|

तकरीरें छोड़ सारी,सब इश्क़ से मालामाल हो
फ़ेंक सारे खंजर सब, छुपाये मुट्ठी में गुलाल हों  
बस ज़िंदगी खुशहाल हो बस ज़िंदगी खुशहाल हो|

बस ज़िंदगी खुशहाल हो बस ज़िंदगी खुशहाल हो|
हो बस रोटी नमक प्याज की, ना घी की तड़की दाल हो  
बस ज़िंदगी खुशहाल हो बस ज़िंदगी खुशहाल हो|

हो हर हीर का रांझां, हर सोनी का महिवाल हो   
हर रोज़ हो ईद दिवाली, हर रोज़ नया साल हो   
बस ज़िंदगी खुशहाल हो बस ज़िंदगी खुशहाल हो||
 


तारीख: 18.04.2020                                                        विवेक द्विवेदी






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