चलो अच्छा हुआ बला टल गई

चलो अच्छा हुआ बला टल गई

खुबसूरती उसकी मुझे खल गई ।

 

जाने क्यों मैं फिदा हुआ ही नहीं

गिरते-गिरते ज़िंदगी संभल गई ।

 

बददुआ रकीबों की हो गई कबूल

वक्त रहते ही दिल से निकल गई ।

 

दूर से कर रही थीं नज़रे इनायत

पास आते आते नियत बदल गई ।

 

शुक्र है खुदा का यारों बच गया मै

उसकी फितरत ही उसे छ्ल गई ।


तारीख: 25.05.2020                                                        अजय प्रसाद






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है