एक खंडहर

एक खंडहर जिसमें

बना हुआ तहखाना है!

आस पास की उड़ती

खबरों ने पहचाना है!!

 

दरवाजे इतिहासों के

पृष्ठ पलटते हैं!

अब आँगन कई कई

हिस्सों में बँटते हैं!!

 

समय सदियों के पूर्व का

लगता अंजाना है!

 

मुगलों से अंग्रेजों तक 

की बची धरोहर!

मिलता है लोकगीतों में

सती का जौहर!!

 

देखकर लगता वर्तमान

बहुत बचकाना है!

 

कवच और कुंडल की

केवल रही कहानी!

सत्य उगलती रही

संत कबीर की बानी!!

 

सेनानायक कहाँ रहे

अलबत्ता थाना है!

 


तारीख: 12.09.2020                                                        अविनाश ब्यौहार






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