एक माँ के खातिर

वो अपनी एक माँ के खातिर दूजी माँ को छोड़ जाते है

अपनी खुशियाँ छोड़कर वो रिश्ता वतन से निभाते है

जीवन में फौज़ी के बड़ी अजीब बात होती है

ना जाने वो खुद भी परिवार से उनकी कौनसी आखिरी मुलाकात होती है

देश की मिट्टी का कर्ज वो कुछ इस तरह चुकाया करते है

देश की आन के लिए वो अपनी जान गवाया करते है

वो फौजी है.....

तिरंगे को ऊंचा रखने के लिए

वो अपना सर्वस्व मिटाया करते है

देश को आबाद देखकर

वो कफन में भी मुस्कुराया करते है

है इस देश के जवान वीर कितने 

ये दुनिया को बतलाते है 

आती है जब कोई मुसीबत सरहद पर

फौज़ी ही खड़े नजर आते है

 


तारीख: 25.05.2020                                                        चेतना पोरवाल






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है