घड़ी की सूईयों से घायल पैरों पर 

घड़ी की सूईयों से घायल पैरों पर 
बदहवास दौड़ती-भागती औरतें 
घर को तरतीब से लगाने की जद्दोजहद करती 
काम पर जाती रही!

दुधमुंहों का दूध बनाते,
आफिस वालों का टिफिन सजाते,
तरकारियों की छौंक लगाते,
रोटियों से कैसरोल भराते,
बच्चों की ब्रैड पर जैम लगाते,
बर्तनों के बिखरे ढेर निपटाते,
गट्ठर कपड़ों के धूप दिखाते,
काम पर जाती रहीं !

बालों को गाँठ कर क्लिप अटकाते,
पिन कर दुपट्टा काँधे लटकाते,
साड़ी की सिकुड़ी क्रीज़ दबाते,
बिंदिया को माथे बीच सरकाते,
पर्स से बोरोलीन लगाते,
छुट्टे पैसे रोज़ बचाते,
काम पर जाती रही!

कभी आधा -कभी पूरा 
कभी खाया कभी छोड़ा 
कभी पक्का कभी कच्चा 
टिफिन भूल कभी गच्चा खाकर 
काम पर जाती रही!

नमी को काजल डाल छिपाते,
पपड़ाए अधरों पर लाली पुताते,
कलाई के दाग पर चूड़ी चढ़ाते,
मैचिंग स्टाल से बदन ढंकाते,
काम पर जाती रही !

रात की आधी नींद ऊंघाते
दुखते सिर पर बाम लगाके
पैरासिटामोल से ताप घटाते
बीपी की सूई पर नजर टिकाते
आए गए का मान मनाते
काम पर जाती रही!

बच्चों को साथ लेकर
पीछे कभी रोता छोड़कर
हाथ में कोई  खिलौना देकर
कभी रोटी का कौर देकर,
पड़ोसी के हाथ बिछौना देकर,
काम पर जाती रही!

कभी पानी भरने
कभी गुड़ाई करने
कभी फसल की 
बुआई करने
कभी आफिस में 
कभी दुकान
कभी पैदल
कभी साईकल
कभी स्कूटी
कभी बाईकर
कभी बस में
कभी ट्रेन में
कभी रिक्शा
कभी वैन से 
काम पर जाती रही

कभी छाता ले
कभी पर्स भूलकर
कभी सोते कभी रोते 
कभी होते कभी खोते 
बच्चों को छोड़कर
काम पर जाती रही!

क्योंकि उन्हें मालूम है कि
उनका काम पर जाना
निश्चयवाचक क्रियाविशेषण है,
इसीलिए वे अपनी हर टूट पर 
हौसले का फेवीकोल लगाकर 
काम पर जाती रही !
 


तारीख: 09.07.2021                                                        सुजाता






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