हरियाली की पाती

हरियाली की
पाती पढ़ता
सावन है!

टकराए आपस में
गरजे मेह!
छलक उठा सहसा
झरनों का नेह!!

छम छम बारिश
अब लगती
मनभावन है!

करें उछल-कूद,
टर्र-टर्र दादुर!
और झींगुर भी
लग रहे बहादुर!!

बहना तोड़कर
किनारों को
प्लावन है!


तारीख: 21.07.2020                                                        अविनाश ब्यौहार






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है