इन अल्फाज़ो का होना मै जरुरी नहीं समझता 

तुमसे बाते करने के लिए,

इन अल्फाज़ो का होना मै जरुरी नहीं समझता 
तुमसे इश्क़ करने के लिए,

इस दिल का धड़कना मै जरुरी नहीं समझता 


तुम्हे बाहों में भरने के लिए,

इस रूह के ऊपर इस लिबास का होना मै जरुरी नहीं समझता 
तुम्हे जिंदगी भर साथ रखने के लिए इस समाज का दिया हुआ ,

ये निकाह या विवाह का होना मै जरुरी नहीं समझता 


अब तो पलके झपका दे, समझ लूंगा की तू जिंदा है 
बस तू अपनी उंगलियों को हिला दे और दिल की धड़कनो को सुना दे 
किसी तरह भी अपने होने का एहसास मझे दिला दे 
तेरा मुझसे भी इतना ही प्यार करना ,अब मै जरुरी नहीं समझता 


तारीख: 24.05.2020                                                        अंकित कुमार श्रीवास्तव






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है