झील हो जाना

टोक 

बहुत लगती है मुझको,

और मैं थम जाती हूँ

बढ़ते।

 

तुमने भी

जब-जब टोका प्यार में 

बहने से मुझको,

मैं वहीं पर थम गयी

झील बन गयी।

 

झील बहती नहीं है,

वो कहीं पहुंचती नहीं है।


तारीख: 01.08.2020                                                        भावना कुकरेती






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