माँ, कभी-कभी मैं

माँ, कभी-कभी
मैं बहुत थक जाती हूँ
काम से नहीं, हालातों से
किसी से कह नहीं सकती
ऐसे अनुभवों में फंसी
बिखरी चली जाती हूँ
माँ, मन करता है फिर से
तेरी बेटी बनकर
तेरी गोद में सोने का
बीते हुए पलों में
फिर से जीने का
माँ, आज माँ बनकर
समझ पायी तेरा दर्द
जो तूने कभी भी
अपने होठों पर
आने नहीं दिया
माँ, मैंने भी तुम्हें
बहुत तकलीफ दी होगी
पर तुमने कभी भी
उसका जिक्र नहीं किया
मौन हो प्यार जताती रही हमसे
गम को छिपा
मुस्कुराती रही सबसे
नादान मैं भी
कभी तेरे गमों को
समझ ना पायी
तेरी परछाई बनकर भी
साथ तेरे ना चल पायी
माँ, आज अपने
सभी गलतियों के लिए
क्षमा चाहती हूँ
हर जन्म में बस तू ही
मेरी माँ बने
ईश्वर से यही मांगती हूँ।


तारीख: 23.06.2020                                                        वंदना अग्रवाल निराली






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