महामारी के बाद

mahamaari

मेरे यंहा रास्तों पर उग रही हैं घांस,
ये घांस, सिर्फ घांस है दुभ नही।

मेरे यंहा दीवारों पर लग रही है काई,
ये काई, सिर्फ मोटी है इसमे फिसलन नही।

मेरे यंहा आम के पेड़ो पर लिपट गयी है बेल,
ये बेल, जंगली है, इसमे फूल नही।

मेरे यंहा खेतों में पड़ गयी हैं दरारें,
दरारों में सीलन है, उगने को बीज नही।

मेरे यंहा पटरियों पर उग गये हैं काटें,
ये काटें पैने हैं, नुकीले हैं, चुभने को पावँ नही।

मेरे यंहा बच्चों पर उग रही है घांस,
इसमे फूल लगे हैं फल लगे हैं,

ये सब मुर्दा हैं इनमे सांस नही,
इन पर उग रहा है अनाज, घांस नही।
_________

इस बरस आनाज खूब ऊगा है,
अबके इसे खूब खाद मिला है।


_________


तारीख: 20.05.2020                                                        अंकित मिश्रा






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है