मैं हमारी अधूरी प्रीत लिख रहा हूं

मैं हमारी अधूरी प्रीत लिख रहा हूं।
तेरे मेरे प्यार की गीत लिख रहा हूं।।

मैं वो शख्श हूं,
जो कभी मुकम्मल ना हुई वो जिद्द लिख रहा हूं।

कभी तेरी चंचल सी मुस्कान,
कभी मेरी आंखों का पानी लिख रहा हूं।

जो जाया हुआ तेरे इन्तजार में
मैं वो खूबसूरत जवानी लिख रहा हूं।

वो जो रात गुजरी थी तेरी याद में
उस याद की कहानी लिख रहा हूं।

जब उठाता हूं कलम तुझे लिखने को
स्याही बोल पड़ती है,
मैं अमानत बेगानी लिख रहा हूं।


तारीख: 24.05.2020                                                        गोविन्द मेहता






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